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विश्व के बहु चर्चित बाबरी मस्जिद-राम जन्म भूमि का कोर्ट में चल रहा विवाद पहुंचा अंतिम चरण में,40 दिनों की अनवरत सुनवाई के बाद फैसला का आ गया समय,नवम्बर माह के दूसरे हफ्ते में आ सकता है फैसला……..

विश्व के बहु चर्चित बाबरी मस्जिद-राम जन्म भूमि का कोर्ट में चल रहा विवाद पहुंचा अंतिम चरण में,40 दिनों की अनवरत सुनवाई के बाद फैसला का आ गया समय,नवम्बर माह के दूसरे हफ्ते में आ सकता है फैसला……..
अब्दुल अज़ीज़
लखनऊ :(NNI 24) :- देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट में प्रतिदिन चल रही 40 दिनों की जिरह की कार्यवाही पूरी हो गयी है और इस मामले में आज बंद दरवाजों के पीछे जजों की बैठक होने वाली है।
अयोध्या की विवादित भूमि को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 6 अगस्त से चल रही सुनवाई बुधवार को पूरी हो गई,अब सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ गुरुवार को फिर से एकत्रित होगी।
सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि पांच जजों की ये बेंच आज गुरुवार को चेंबर में बैठेगी।
बंद दरवाजे के पीछे होने वाली इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता पैनल की रिपोर्ट को लेकर आगे के रास्ते पर भी विचार करेंगे। वहीं कोर्ट सुन्नी वक्फ बोर्ड के दावा वापस लेने पर भी सुप्रीम कोर्ट चर्चा कर सकता है।
इस बैठक में जज इस बात पर भी चर्चा करेंगे कि क्या मध्यस्थता पैनल की रिपोर्ट की सामग्री सार्वजनिक करने की जरूरत है या नहीं।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर छह अगस्त से रोजाना 40 दिन तक सुनवाई की गयी। इस दौरान विभिन्न पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं गयीं।
संविधान पीठ ने इस मामले में सुनवाई पूरी करते हुए संबंधित पक्षों को ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ (राहत में बदलाव) के मुद्दे पर लिखित दलील दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया।
संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर भी शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक मध्यस्थता पैनल ने भी अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है।
 इसमें एक बड़ी ये भी ख़बर सामने आ रही है कि सुन्नी वक्फ़ बोर्ड सरकार को जमीन देने को तैयार हो गया है। साथ ही वक्फ बोर्ड दूसरी जगह मस्जिद बनाने के लिए भी तैयार है जबकि मुस्लिम पक्षकार ने सुन्नी वक्फ बोर्ड के केस वापस लेने की बात को मात्र अफवाह बताया है।
अयोध्या मामले में सुनवाई के 39वें दिन बुधवार को खबर फैली कि विवादित जमीन से सुन्नी वक्फ बोर्ड अपना दावा छोड़ेगा, तो हर ओर हलचल मच गई। इस पर अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर अपना दावा छोड़ने संबंधी किसी तरह के नए हलफनामा देने से इंकार किया है। उनका कहना है कि कोर्ट में सुनवाई का बुधवार को आखिरी दिन था। बोर्ड की ओर से कोई हलफनामा पेश नहीं किया गया है। कुछ लोग अफवाह फैला रहे हैं। इस सम्बंध में ऑल इंडिया बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी (एआईबीएमएसी) के संयोजक जफरयाब जिलानी ने कहा है कि उन्हें सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा अपील वापस लेने की कोई जानकारी नहीं है।
वहीं अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बयान जारी कर दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुलह-समझौता कमेटी में सदस्य नामित किए गए वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू को हलफनामा देकर सुन्नी सेंट्रल बोर्ड की ओर से दावा छोड़ने की बात सामने आई है, सूत्रों के मुताबिक इस हलफनामें में जन्म भूमि विवाद मामले में समझौते के पक्ष मे मुस्लिम पक्षकारों का कहना है की हम अपना दवा
कुछ शर्त के साथ छोड़ सकते हैं जिसके मुताबिक देश भर में जिन 2000 से ज़्यादा ऐतिहासिक मस्जिदों को ASI ने अधिग्रहीत किया हुआ है उनमें मुसलमानों को नमाज़ अदा करने की बिना शर्त इजाज़त दी जाये। इसके अलावा हिन्दू पक्षकार अन्य मस्जिदों मसलन मथुरा, काशी  जैसी जगहों पर  200 से ज़्यादा मस्जिदों पर दावा छोड़ दें,लेकिन इसका कोई मतलब नहीं है।इस सुनवाई के दौरान एक और वकील भी जिरह के बीच में बोलने लगे जिस पर CJI ने कहा कि हम सुनवाई अभी बंद कर देंगे और अगर ऐसे ही टोका टाकी होगी तो हम अभी ही इस सुनवाई को पूरा मान लेंगे।कार्यवाही के दौरान हिंदू पक्ष के वकील ने SC में एक नक्शा दिखाने का प्रयास किया जिसे बाबरी मस्जिद मामले के वकील राजीव धवन जो मुस्लिम पक्षकारों में से एक वकील हैं ने वह नक्शा फाड़ दिया। कल उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक नक्शे को फाड़ दिया था।चीफ जस्टिस आफ इंडिया श्री गंगोई आगामी 17 नवम्बर को रिटायर भी हो रहे हैं और इस कारण इस केश का फैसला इससे पहले होने की संभावना काफी प्रबल मानी जा रही है।अयोध्या मामले के सम्भावित फैसले को देखते हुये अयोध्या में धारा 144 लगा दी गयी है और रामजन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास,रामविलास वेदांती समेत कई की सुरक्षा बढ़ाई गई है।महंत नृत्यगोपाल दास को Y श्रेणी की सुरक्षा दी गई है।साथ ही यूपी सरकार ने  फील्ड में तैनात सभी अफसरों की छुट्टियां 30 नवम्बर तक रद्द कर दी है और उन्हें मुख्यालय में बने रहने के आदेश दिये गये हैं।देश का बहु चर्चित अयोध्या विवाद पहली बार 1885 में कोर्ट में पहुंचा था, निर्मोही अखाड़ा 134 साल और सुन्नी वक्फ बोर्ड 58 साल से जमीन पर मालिकाना हक की मांग कर रहा है ।

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