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कोरोना के कहर ने 2020 के हज कार्यक्रम पर लगाया ग्रहण,,,,,,,,

 

कोरोना के कहर ने 2020 के हज कार्यक्रम पर लगाया ग्रहण,,,,,,,,

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अब्दुल अज़ीज़

नोएडा :(NNI 24) अमतर्राष्ट्रीय स्तर पर कहर बरपा कर रही अज्ञात बीमारी कोविड – 19 (कोरोना वायरस) ने पूरी दुनिया को अपने मकड़जाल में फंसा लिया है और देखते देखते दुनिया भर की आम जिंदगी थम सी गयी लेकिन इसकी वजह धार्मिक अनुष्ठानों पर भी असर पड़ा है देश और दुनिया की इबादतगाहों में ताले लटकने लगे हैं और हर किसी को न चाहते हुये भी अपने घरों को कैद कर दिया है।कोरोना के कहर को देखते हुये लोगों के मांगलिक कार्यक्रम तो बन्द ही कर दिये गये हैं बल्कि तीज त्यौहार और सभी सामूहिक धार्मिक कामों पर भी पाबंदी लगा दी गयी है और ये पाबंदी यहां तक पहुंच गई है कि इस्लाम धर्म के पवित्र रमज़ान माह की तरावीह और हज ए बैतुल्ला की ज़ियारत पर भी ग्रहण लगता नजर आ रहा है।सऊदी अरबिया की सरकार की ओर से ऐसी भी जानकारी आ रही है जिसमें कहा जा रहा है कि इस बार रमज़ान की तरावीह पढ़ने को निलंबित किये जाने पर विचार किया जा रहा है बल्कि सूत्र तो यहां तक बता रहे हैं कि सऊदी सरकार ने इस गम्भीर मसले पर लगभग अपना फैसला भी सुरक्षित कर लिया है।इसी तरह आगे आने वाले हज कार्यक्रम को निलंबित करने की आशंकाएं बढ़ गयी हैं किसको लेकर मुस्लिम समाज मे तरह तरह की भ्रान्तियाँ भी लोगों में पैदा होने लगी है कि यदि ऐसा होता है तो सीधे तौर पर इस्लाम को खत्म करने की साजिश रची जा रही है और कबसे इस्लाम वजूद में आया है तबसे ये पहला मौका होगा जब हज निलंबित होगा लेकिन इस खबर के माध्यम से NNI 24 ने अपने पाठकों की इस समस्या को देखते हुये ये खोज निकाला है कि हिन्दुस्तान के मुसलमानों आपको किसी भरम में नही पड़ना है क्योंकि फिलहाल इस पर अभी कोई फैसला नही आया है लेकिन यदि ऐसा होता भी है तो इसमें कोई अचरज की बात नही होगी क्योंकि इससे पूर्व भी ऐसी समस्याएं आ चुकी हैं जब हज के कार्यक्रम को स्थगित किया गया था।तो आपकी जानकारी के लिये की गई खोज में पाया गया कि………..

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इस्लामी तारीख़ में फ़राइज़े हज कितनी बार अदा नहीं हो सका
1. 865 ई. इस्माइल बिन यूसुफ़ अल-सफ़ाक के मक्का मुकर्रमा पर हमले की वजह से
2. 930 ई. अबु तहिर अल-जनबी के मक्का मुकर्रमा पर हमले की वजह से
3. 983 से 990 ई. तक अब्बसी ख़िलाफ़त और उस वक्त शाम में मौजूद फ़ातिमी ख़िलाफ़त की आपसी जंगों की वजह से 8 साल तक हज नहीं हो सका
4. 1831 ई. में प्लेग की वबा फैलने की वजह से
5. 1837 se 1840 ई. तक प्लेग की वजह से 3 साल तक हज अदा नहीं हो सका
6. 1846 ई. में मक्का में हैजा फ़ैलने की वजह से हज अदा नहीं हो सका
7. 1865 और 1883 ई. में भी वबा फ़ैलने की वजह से हज का फ़राइज़ अदा नहीं हो सका।

लिहाज़ा मुसलमानों में ये दहशत फ़ैलाना दुरुस्त नहीं हे कि अगर हज न हुआ तो ये होगा और वो होगा।
जंग और हमले तो इंसानी वजह हैं, मगर वबा से अक्सर हज अदा नहीं हो सका। मौजूदा सूरत-ए-हाल वबा की शक्ल ही हे, इसलिए किसी तरह की ग़लत-बयानी व ग़लत-फ़हमी फ़ैलाना मुनासिब नहीं होगा।हमेअल्लाह पर भरोसा  रखना चाहिये और दुआ करनी चाहिए  कि अल्लाह पाक हम सब को वह दिन न दिखाए।

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अल्लाह तमाम मुसलमानों पर रहम फ़रमाए…….

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