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संसद से निकलकर राष्ट्रपति भवन पहुंचा कृषि बिल

संसद से निकलकर राष्ट्रपति भवन पहुंचा कृषि बिल ,,,,,

*केंद्र और राज्यों के बीच तकरार होगा ?*
*सत्ता और किसानों के बीच का मसला है यह बिल ?*
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देवेन्द्र यादव

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कोटा,राजस्थान : (NNI 24) संसद से निकलकर राष्ट्रपति भवन पहुंचा कृषि बिल महामहिम राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद, किसान आंदोलन भी, उत्तर के पंजाब और हरियाणा से निकलकर, दक्षिण के कर्नाटक और तमिल नाडु में पहुंच गया है !
सोमवार 28 सितंबर को कर्नाटक और तमिलनाडु में किसानों का जबरदस्त विरोध देखने को मिला !
कृषि बिल सत्ता और किसानों के बीच का मसला था और है, मगर सत्ता के पास समस्या के समाधान के लिए, किसानों को भरोसा देने और प्रतिपक्ष पर आरोप लगाने के अलावा कुछ नहीं है वही किसानों के पास आंदोलन के अलावा कुछ नहीं है, इसी बीच कांग्रेस की अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने धारा 254-2 का संवैधानिक हवाला देते हुए राज्यों से कहा है कि वह इस बिल को खारिज कर अपने-अपने राज्यों में किसानों के लिए नया कानून बनाएं !
कई राज्यों में कांग्रेस की अपनी सरकारें हैं क्या उन राज्यों में कृषि बिल को लेकर राज्य और केंद्र के बीच तकरार होगा, उत्तर प्रदेश उत्तराखंड असम हिमाचल जैसे राज्यों को छोड़ दे तो ज्यादातर राज्यों में भाजपा गठबंधन की सरकार चला रही है क्या कृषि बिल को लेकर उन राज्यों में भी तकरार की स्थिति देखने को मिलेगी !
महामहिम राष्ट्रपति की कृषि बिल पर मोहर के बाद, बिल के विरोध में लोग अदालत का दरवाजा खटखटाने का भी विचार बना रहे हैं बिल के खिलाफ केरल के सांसद इन नंद टी प्रथा पल ने सुप्रीम कोर्ट में एक पिटीशन भी डाल दी है, तमिलनाडु के नेता स्टालिन भी कोर्ट में जाने की बात कर रहे हैं !
भाजपा और सरकार के नेता आरोप लगा रहे हैं कि कांग्रेस सहित विपक्ष कृषि बिल को लेकर किसानों को भड़का रहे हैं इसी भी पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह कृषि बिल के खिलाफ धरना देते हुए नजर आए वही तमिलनाडु के नेता स्टालिन किसानों के समर्थन में खड़े नजर आए !
किसान और देश का बुद्धिजीवी वर्ग, कह रहा है कि सरकार तीन कृषि बिलो के अलावा किसानों के पक्ष में चौथा बिल भी लेकर आए?
संसद का मानसून सत्र समाप्त हो गया हे और बिहार में राज्य विधानसभा के चुनावों की भी घोषणा हो चुकी है, ऐसे में सरकार चौथे कृषि बिल की ना तो घोषणा कर शक्ति है और ना ही लागू !
ऐसे में ध्यान देने वाली दो बातें हैं क्या राज्य श्रीमती सोनिया गांधी के द्वारा कहीं गई 254 दो का उपयोग करेंगे और क्या किसान सहित विपक्षी दल इस बिल के खिलाफ अदालतों में जाएंगे यह देखना अभी बाकी है !

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