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रोज़ा और दुआ का आपस में गहरा सम्बन्ध है,दुआ मोमिन का हथियार है, रमज़ान दुआ की कबूलियत का महीना है,,,,,,मौलाना सिराज

रोज़ा और दुआ का आपस में गहरा सम्बन्ध है,दुआ मोमिन का हथियार है, रमज़ान दुआ की कबूलियत का महीना है,,,,,,मौलाना सिराज

बहराइच : (NNI 24) रमज़ान का महीना दुआओं का महीना है, रोज़ा और दुआ का आपस में गहरा सम्बन्ध है,दुआ मोमिन का हथियार है, रमज़ान दुआ की कबूलियत का महीना है, रोज़े दार की दुआ रद्द नहीं की जाती है और इफ्तार के वक्त की दुआ रद्द नहीं की जाती है दुआ अल्लाह पाक की तरफ से एक नेमत है इन ख्यालात का इजहार मदरसा सुल्तानुल उलूम सोसायटी मीरपुर कस्बा व मदरसा आमिना लिलबनात मोहल्ला सालारगंज बहराइच के संस्थापक एवं प्रबंधक मौलाना सिराज अहमद मदनी ने किया
उन्होंने कहा कि दुनिया की हर चीज अल्लाह के हुक्म की मोहताज है उसने दिन रात बनाया हफ्ते और महीने तकसीम किया वैसे तो हर दिन अल्लाह का ही है लेकिन अल्लाह पाक ने कुछ दिन कुछ रातें कुछ महीने खास किये है जिनमें इबादत करने का सवाब बढ़ा दिया जाता है और दुआ कबूल की जाती है उसमें से एक महीना रमजानुल मुबारक का महीना है जिसमें दुआ कबूल होती है, रमज़ानुल मुबारक का पूरा महीना दुआ की कबूलियत के लिए खास अहमियत रखता है इसलिए इस मुकद्दस महीने में दुआओं का खूब एहतमाम करना चाहिए, हज़रत मुहम्मद सललललाहू अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि जब कोई बंदा दुआ करता है तो उसकी दुआ कबूल होती है या अगर दुआ कबूल न हो तो उसके बदले कोई दूसरी नेमत दी जाती है या उसके ऊपर से कोई मुसीबत टाल दी जाती है या फिर आखिरत के लिए जखीरा कर दी जाती है
हज़रत मुहम्मद सललललाहू अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि रमज़ान के हर शब व रोज़ में जहन्नुम से कैदी छोड़े जाते हैं और हर मुसलमान की रात व दिन में एक दुआ ज़रूर कबूल होती है,इसी तरह हज़रत मुहम्मद सललललाहू अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि तीन आदमियों की दुआ रद्द नहीं होती है (1) रोजेदार की इफ्तार के वक्त,(2)आदिल (इंसाफ पसंद) बादशाह की,(3)मजलूम की,
जब कोई बंदा अल्लाह पाक से नहीं मांगता है तो अल्लाह पाक उससे नाराज़ होते हैं सारी दुनिया में ऐसा कोई नहीं जो ना मांगने पर नाराज़ हो मगर अल्लाह पाक इतना मेहरबान है कि जो बंदा अल्लाह पाक से न मांगे तो वह उससे नाराज़ होता है, अल्लाह पाक से दुआ न करना तकब्बुर की अलामत है और मांगने पर अल्लाह पाक खुश होता है और बंदा जो मांगता है अल्लाह पाक अपनी रहमत से उसे अता करता है
मौलाना सिराज अहमद मदनी ने कहा कि हदीस ए नबवी में है कि रमज़ान की हर रात अल्लाह पाक एक फरिश्ते को अर्श से फर्श पर भेजता है जो यह एलान करता है कि”ऐ खैर व भलाई के चाहने वाले आगे बढ़ो, क्या कोई है जो दुआ करे ताकि उसकी दुआ कबूल की जाए, क्या कोई है जो इस्तिगफार करे कि उसे बख्श दिया जाए, क्या कोई है जो तौबा करे ताकि उसकी तौबा कबूल की जाए, क्या कोई है जो सवाल करे जिसको पूरा किया जाए।

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